बैंक सावधि जमा सबसे सुलभ और लोकप्रिय निवेश-साधन है। आजकल, बचत खातों में एक निश्चित राशि से अधिक होने पर बैंक स्वत: ‘स्वीप’ द्वारा सावधि जमा में स्थानांतरित करने की सुविधा भी प्रदान करते हैं, ताकि कुछ ‘अतिरिक्त’ ब्याज कमाया जा सके।

अधिकांश एचएनआई, वेतनभोगी और सेवानिवृत्त व्यक्ति पूंजी की सुरक्षा के लिए सावधि जमा में भारी मात्रा में निवेशित हैं।

सावधि जमा – एक लोकप्रिय उत्पाद

आइए सावधि जमा के विभिन्न पहलुओं पर एक नज़र डालें जो इसे एक बहुत लोकप्रिय उत्पाद बनाते हैं। सकारात्मक पहलू:

  • सावधि जमा, एक बचत खाते की तुलना में अधिक ब्याज देते हैं।
  • जमा की अवधि जितनी अधिक होगी, उतनी ही अधिक ब्याज दर होगी।
  • सावधि जमा को सुरक्षित निवेश माना जाता है।
  • निवेश पर कोई शुल्क नहीं लगता है।

और नकारात्मक पहलू (लोकप्रियता के बावजूद):

  • ब्याज दर के साथ-साथ अवधि भी निश्चित है। परिपक्वता से पहले निकासी पर प्रतिबंध हैं। आपको समयपूर्व निकासी के लिए जुर्माना देना पड़ सकता है।
  • मुद्रास्फीति-समायोजित करने के बाद वास्तविक रिटर्न कम है।
  • एफडी पर अर्जित ब्याज को आपकी आय में जोड़ा जाता है और आपके टैक्स स्लैब के अनुसार कर लगाया जाता है।
  • यदि आपकी कुल ब्याज आय 10,000 रुपये से अधिक है (इस वर्ष के बजट में यह सीमा 40,000 कर दी गई) तो बैंक 10% की दर से स्रोत पर टैक्स (टीडीएस) काट लेता है।

एफडी के विकल्प

तो, क्या हमारे पास कोई विकल्प है?

बिल्कुल है! आपने म्यूचुअल फंड के बारे में सुना होगा। ऐसे म्यूचुअल फंड उत्पाद हैं जो न केवल आपको उच्च रिटर्न देते हैं बल्कि कर के दृष्टिकोण से बेहतर भी हैं।

म्यूचुअल फंड की विभिन्न श्रेणियां हैं। डेट म्यूचुअल फंड इक्विटी में निवेश नहीं करते हैं और अपेक्षाकृत सुरक्षित होते हैं। लिक्विड फंड और अल्ट्रा-शॉर्ट अवधि फंड को विशेषज्ञ फिक्स्ड डिपॉजिट के विकल्प के रूप में पेश करते हैं।

ये फंड कम चंचलता के साथ स्थिर रिटर्न देते हैं। पिछले एक साल में, लिक्विड और अल्ट्रा-शॉर्ट टर्म फंड्स ने औसतन 6.5~6.9% रिटर्न दिया है।

म्यूचुअल फंड्स! क्या वास्तव में उपयोगी हैं?

साभार: म्यूचुअल फ़ंड सही है

आइए, अब सभी पहलुओं पर सावधि जमा के साथ म्यूचुअल फंड की तुलना करें:

रिटर्न दर

एफडी की दरें पूर्व-निर्दिष्ट और निश्चित हैं, यानी वे पूरे कार्यकाल के लिए नहीं बदलते हैं। जबकि म्यूचुअल फंड रिटर्न बाजार से जुड़े होते हैं और बेहतर रिटर्न कमाने की क्षमता रखते हैं।

आज के परिदृश्य में, जबकि एफडी ~7% रिटर्न की पेशकश कर रहे हैं, लिक्विड और अल्ट्रा-शॉर्ट अवधि फंड्स ने ~6.9% रिटर्न दिया है।

जमा अवधि

आम तौर पर एफडी का कार्यकाल जितना लंबा होता है, ब्याज दर उतनी अधिक होती है। लेकिन यह डेट म्यूचुअल फंड के लिए नहीं कहा जा सकता है। विभिन्न अवधि के लिए डेट फंड की विभिन्न श्रेणियां हैं। और ये फंड ऐसे साधनों में निवेश करते हैं जो उनकी परिपक्वता के समय से मेल खाते हैं।

पूंजी की सुरक्षा

सावधि जमा को पूरी तरह से सुरक्षित माना जाता है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि डिफ़ॉल्ट के मामले में बैंक की देय ज़िम्मेदारी केवल एक लाख रुपये तक सीमित है जिसमें पूंजी भी शामिल है।

म्यूचुअल फंड किसी भी गारंटीड रिटर्न का आश्वासन नहीं देते हैं। लेकिन वे पेशेवर प्रबंधकों द्वारा व्यवस्थित होते हैं और पूरी पारदर्शिता से सभी निवेशों और खर्चों की घोषणा करते हैं। डेट म्यूचुअल फंड ज्यादातर उच्च गुणवत्ता वाले प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं।

निवेश लागत

जबकि एफडी में निवेश से जुड़ी कोई लागत नहीं होती है, म्यूचुअल फंड व्यय अनुपात के रूप में शुल्क लेते हैं।

डेट म्यूचुअल फंड 0.1~1.0% के बीच व्यय शुल्क लेते हैं। यह व्यय आपके रिटर्न में समायोजित होता है। इसलिए जो रिटर्न मिलता है, वह खर्च करने के बाद है।

लिक्विडिटी या तरलता

एफडी में अवधि निश्चित होती है और इसीलिए तरलता बहुत कम होती है। समय से पहले निकासी के मामले में, आपको जुर्माना देना होगा और तदनुसार रिटर्न कम हो जाएगा।

म्यूचुअल फंड के मामले में, अधिकांश फंड उच्च तरलता प्रदान करते हैं। डेट म्यूचुअल फंड, सामान्य रूप से कोई एक्जिट लोड नहीं लेते हैं। और आप एक दिन के भीतर अपना पैसा प्राप्त कर सकते हैं।

मुद्रास्फीति

साभार: मूचुअल फ़ंड सही है

सावधि जमा में निवेश करते समय, हम मुद्रास्फीति की अनदेखी करते हैं। यदि आपका फिक्स्ड डिपॉजिट 7% p.a. देता है जब मुद्रास्फीति 5% है तो आपका वास्तविक रिटर्न सिर्फ 2% रह जाता है! यह बचत खाते के रिटर्न से भी कम है।

म्यूचुअल फंड में आपको बेहतर मुद्रास्फीति-समायोजित रिटर्न देने की क्षमता है। जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है कि रिटर्न 6~7% की रेंज में है।

आयकर

फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज आपके आयकर स्लैब के अनुसार कर योग्य है। और अगर आप उच्चतम कर स्लैब में हैं, तो यह सबसे अधिक चिंताजनक है।

दूसरी ओर, डेट म्यूचुअल फंड्स में लंबी अवधि (यानी 3 साल से अधिक) के निवेश पर इंडेक्सेशन के साथ 20% और इंडेक्सेशन के बिना 10% (जो भी कम हो) दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर का प्रावधान है। यदि निवेश अवधि 3 साल से कम है तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन आपके टैक्स स्लैब के अनुसार देय है।

वास्तव में देखा जाए तो डेट म्यूचुअल फंड्स महंगाई-समायोजित रिटर्न पर ही कर लगाते हैं। सावधि जमा के मामले में ऐसा नहीं है। इसलिए हम कह सकते हैं कि एफडी की तुलना में म्यूचुअल फंड्स अधिक कर अनुकूल हैं।

स्रोत पर आयकर कटौती (टीडीएस)

यदि आपकी कुल ब्याज आय एक वर्ष में 10,000 रुपये से अधिक है, तो बैंक आपके एफडी पर 10% की दर से टैक्स (टीडीएस) काटता है। इस वर्ष के बजट में इस सीमा को बढ़ाकर 40,000 कर दिया गया है और यह वित्त वर्ष 2019-20 के लिए प्रभावी है।

ध्यान रहे कि टीडीएस की सीमा में वृद्धि आपके देय टैक्स को प्रभावित नहीं करती है। आपको आयकर रिटर्न में ब्याज से आय की घोषणा करने और अपने स्लैब के अनुसार कर का भुगतान करने की आवश्यकता है।

म्यूचुअल फंड स्रोत पर आयकर कटौती नहीं करते हैं। आपको अपने निवेश की अवधि के अनुसार दीर्घकालिक या अल्पकालिक पूंजीगत लाभ की गणना स्वयं करनी है। और तदनुसार आयकर भुगतान करने की आवश्यकता है।

उदाहरण

तुलना सावधि जमा अल्प काल डेट म्यूचुअल फंड अल्प काल सावधि जमा दीर्घ काल डेट म्यूचुअल फंड दीर्घ काल
निवेशित राशि 1,00,000 1,00,000 1,00,000 1,00,000
रिटर्न (% सालाना) 7% 7% 7% 7%
निवेश अवधि 1 वर्ष 1 वर्ष 3 वर्ष 3 वर्ष
परिपक्वता राशि 1,07,000 1,07,000 1,21,000 1,21,000
मँहगाई दर 5% 5% 5% 5%
इंडेक्सेशन के बाद निवेश 1,15,000
कर योग्य आय 7,000 7,000 21,000 6,000
आयकर देय 2,100 (30%) 2,100 (30%) 6,300 (30%) 1,200 (20%)
कर उपरांत लाभ 4,900 4,900 14,700 19,800
कर उपरांत रिटर्न (%) 4.9% 4.9% 4.9% 6.6%

उपरोक्त तालिका में, हमारा प्रारंभिक निवेश 1 लाख रुपये है। मान लें कि अगले 3 वर्षों के लिए सालाना रिटर्न 7% और मुद्रास्फीति दर 5% है।

1 साल के लिए एफडी में निवेश किया गया 1 लाख रुपये बढ़कर 1.07 लाख रुपये हो जाता है। ब्याज से आय एक निवेशक के टैक्स स्लैब के अनुसार कर योग्य है। उच्चतम स्लैब के निवेशक को 2,100 रुपये आयकर का भुगतान करना होगा। यानि कर-पश्चात रिटर्न मात्र 4.9% है, जो मुद्रास्फीति दर (5%) से भी कम है!

डेट म्यूचुअल फंड के मामले में, 1 वर्ष की अवधि में शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन लागू होता है, यानी टैक्स स्लैब के अनुसार आयकर देय है। और इसलिए, स्थिति एफडी के समान है।

यदि आप 3 साल के लिए एफडी में निवेश करते हैं, तो भी आपको 30% कर का भुगतान करने की आवश्यकता है और आपका कर उपरांत रिटर्न अब भी मुद्रास्फीति से कम है।

यहां डेट म्यूचुअल फंड के साथ इंडेक्सेशन का कमाल देखिए। मुद्रास्फीति (@ 5% सालाना) की वजह से निवेश की लागत 1.15 लाख रुपये हो जाती है। इस प्रकार कर योग्य लाभ 21,000 रुपये से घटकर मात्र 6,000 रुपये रह जाता है। और सोने पर सुहागा यह है कि आपको 30% की बजाए 20% की कम दर पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ का भुगतान करने की आवश्यकता है।

फलस्वरूप कर-पश्चात रिटर्न 6.6% हो जाता है जो न केवल सावधि जमा से अधिक है, बल्कि मुद्रास्फीति को भी आराम से मात देता है।

निष्कर्ष

फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड के बीच चयन करने का निर्णय, आपके निवेश की अवधि और व्यक्तिगत जोखिम लेने की क्षमता पर आधारित होना चाहिए।

म्यूचुअल फंड में न केवल बेहतर मुद्रास्फीति-समायोजित रिटर्न देने की क्षमता है, बल्कि बेहतर कर-पश्चात रिटर्न भी। और इसलिए डेट म्यूचुअल फंड, फिक्स्ड डिपॉजिट का सबसे अच्छा विकल्प है।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *