अभी तक आपने म्यूचुअल फंड के विषय में मूलभूत जानकारी ले ली। अब एक महत्वपूर्ण प्रश्न यह उठता है कि म्यूचुअल फंड में हम स्वयं निवेश करें या किसी वितरक के द्वारा। यानि म्यूचुअल फंड में निवेश करने के दो तरीके होते हैं :

  1. नियमित (regular) प्लान
  2. प्रत्यक्ष (direct) प्लान
साभार: म्यूचुअल फ़ंड सही है

नियमित (regular) प्लान:

म्यूचुअल फंड में निवेश करने में आपकी मदद करने के लिए विभिन्न वितरक मौजूद हैं जैसे कि स्वतंत्र एजेंट, शेयर ब्रोकर, वित्तीय सलाहकार, बैंक, इत्यादि।

आपके निवेश के बदले आपके वितरक को म्यूचुअल फ़ंड हाउस द्वारा लगभग 1% कमीशन के रूप में दिया जाता है।

यह देखा गया है कि एक निवेशक सीधे तौर पर किसी वितरक को कमीशन नहीं देना चाहता है। शायद इसीलिए नियमित प्लान में वितरक का कमीशन अंतर्निहित होता है।

वैसे तो यह कमीशन पारदर्शी और सीमित (1% से कम) होता है, फिर भी यह फंड के मूल्य और रिटर्न पर प्रभाव डालता है।

इनके माध्यम से निवेश करने के कुछ फायदे हैं: बेहतर फंड का चुनाव, पोर्टफोलियो पर एक्सपर्ट राय, सम्पूर्ण फंड मैनेजमेंट, आदि।

प्रत्यक्ष (direct) प्लान:

प्रत्यक्ष प्लान में आप, किसी म्यूचुअल फंड वितरक के सहयोग के बिना, स्वयं म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं।

इसमें नियमित प्लान की तरह कमीशन अंतर्निहित नहीं होता है। इसलिए आपके निवेश के बदले म्यूचुअल फ़ंड हाउस को 1% कमीशन नहीं देना पड़ता है।

इसकी वजह से आपका रिटर्न नियमित प्लान की तुलना में लगभग 1% ज्यादा होगा। इस दृष्टिकोण से एक निवेशक के लिए प्रत्यक्ष प्लान ज्यादा लाभदायक है।

आप परोक्ष रूप से कमीशन देने से बच जाते हैं। और चूँकि आपने किसी वितरक की सेवा नहीं ली है, अत: आप प्रत्यक्ष रूप से भी कोई कमीशन नहीं देते हैं।

प्रत्यक्ष प्लान में निवेश करने के कुछ फायदे हैं : बेहतर रिटर्न, बेहतर कंट्रोल, बिचौलिये से आजादी, आदि।

नियमित या प्रत्यक्ष: किसे चुनें?

प्रश्न यह उठता है कि क्या आप वास्तव में स्वयं निवेश करने में सक्षम हैं? आप अपनी जरूरतों को, अपने लक्ष्य को सही ढंग से परिभाषित कर पाते हैं?

आप निवेश के लिए उपयुक्त फंड का चुनाव, पोर्टफोलियो में फंड की संख्या, इत्यादि का निर्णय बिना पूर्वाग्रह के ले सकते हैं?

अधिकांश निवेशक के पास इतना अनुसंधान करने का न तो समय होता है ना ही सुविधा। आधे-अधूरे जानकारी को सम्पूर्ण मानकर, अपने इष्ट-मित्रों के सलाह को सर्वोचित समझकर बार-बार, हर बार वही गलती दोहराते हैं।

जरूरत से ज्यादा फंड में निवेश, फंड के मूल उद्देश्य को समझे बिना बाजार से अधिक रिटर्न की उम्मीद, जल्दी-जल्दी फंड में बदलाव। और न जाने क्या-क्या।

अंत में इस निर्णय पर पहुँचते हैं कि “बाज़ार से दूर रहना ही उचित है, छोटे निवेशकों के लिए FD और PF से बेहतर विकल्प कोई नहीं।”

सही सलाहकार की भूमिका

आपने कभी सोचा है – क्या आप अपने कपड़े स्वयं बुनते हैं? अपने जूते खुद सिलते हैं? घर के बर्तन भी बनाते हैं? मकान (ईंट, सीमेंट, आदि) का निर्माण खुद से करते हैं?

जाहिर है, नहीं। हर कार्य के लिए एक अलग विशेषज्ञ होता है जो उस काम को बेहतर ढंग से कार्यान्वित करता है।

तो निवेश के लिए वित्तीय सलाहकार की सेवा लेने से कतराना क्यों! जरूरी नहीं कि हर सलाहकार मोटी फीस मांगे। या उसके सलाह के पीछे कमीशन ही एकमात्र वजह हो।

एक सही सलाहकार आपके सभी वित्तीय पहलू को समझ कर सही निर्णय लेने में आपकी मदद करेगा। आपके परिश्रम से अर्जित धन को उचित फंड में निवेश करने में आपका सहयोग करेगा।

साभार: म्यूचुअल फ़ंड सही है

 म्यूचुअल फ़ंड सरल है

इतिहास गवाह है कि लंबी अवधि में जो रिटर्न इक्विटि यानि शेयर बाजार से मिलता है, किसी अन्य निवेश माध्यम से संभव नहीं। 

बिना जानकारी के शेयर बाजार में सीधे निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए आम निवेशकों के लिए सबसे उपयुक्त माध्यम हैं म्यूचुअल फंड्स।

एक सक्षम फंड मैनेजर सोच समझ कर एक निर्धारित नीति के तहत शेयर बाजार में निवेशित करता है और उसका लाभ निवेशकों तक पहुंचाता है।

‘म्यूचुअल फ़ंड निवेशक’ पर उपलब्ध निवेश-योग्य फंड्स, निवेश-योग्य पोर्टफोलियो और निवेश-योग्य मंच के द्वारा निवेशकों की हर समस्या को दूर करने का भरसक प्रयास किया गया है।

यदि आप म्यूचुअल फ़ंड में पहली बार निवेश करने जा रहे हैं तो भी चिंता की कोई बात नहीं। ‘म्यूचुअल फ़ंड निवेशक’ मुख्यत: आप-जैसे निवेशकों के लिए ही बनाया गया है।

यदि आप यह साईट पढ़ रहे हैं तो यकीन मानिए आप यह कार्य स्वयं कर सकते हैं। पहली बार म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करने का तरीका जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।