क्योंकि लंबी अवधि में (बहुत कम जोखिम के साथ) धन सृजन का सबसे उपयुक्त माध्यम है- म्यूचुअल फंड्स।

म्यूचुअल फ़ंड की लोकप्रियता

30 अप्रैल 2018 को 7.22 करोड़ निवेशकों के 23.26 लाख करोड़ रु म्यूचुअल फंड के विभिन्न स्कीमों में निवेशित हैं। (स्रोत: AMFI) और यह राशि हर महीने बढ़कर एक नया रिकॉर्ड बनाती जा रही है।

जब आप AMFI लिंक पर क्लिक करेंगे तो आपको नवीनतम आँकड़ा प्राप्त होगा।

यह इस बात का प्रमाण है कि आम निवेशकों के बीच म्यूचुअल फ़ंड अब लोकप्रिय होते जा रहे हैं।

साभार: म्यूचुअल फ़ंड सही है

म्यूचुअल फ़ंड से घबराना क्यों?

किसी भी निवेशक के लिए पहली बार म्यूचुअल फ़ंड में प्रवेश करना असहज होता है। म्यूचुअल फ़ंड को लेकर निवेशक के मन में कई सारे सवाल उमड़ते हैं।

मसलन, क्या म्यूचुअल फ़ंड निवेश के लिए सही विकल्प है? क्या यह पूरी तरह सुरक्षित है? कैसे अपने धन को निवेश के जरिए व्यवस्थित किया जाए? कैसे म्यूचुअल फ़ंड में निवेश किया जाए? आदि …

ऐसे सभी सवालों के सार्थक उत्तर आपको – “म्यूचुअल फ़ंड सही है” – वेबसाईट पर मिल जाएंगे।

म्यूचुअल फ़ंड सही है – वेबसाईट पर म्यूचुअल फंड से संबंधित सम्पूर्ण जानकारी प्रामाणिक रूप से उपलब्ध है। कृपया इस साईट पर अवश्य जाएँ और उपलब्ध जानकारी का लाभ उठाएँ।

म्यूचुअल फ़ंड निवेशक’ में इन्हें दोहराने से कोई फायदा नहीं। इसलिए हम म्यूचुअल फंड में निवेश करने से संबंधित अन्य विषयों पर ध्यान केन्द्रित करेंगे।

फिर भी कुछ मुख्य प्रश्नों का उत्तर दे देते हैं।

म्यूचुअल फ़ंड क्या है?

बहुत सारे निवेशकों की धनराशि जमा होने पर ही म्यूचुअल फंड की सृष्टि होती है। यह एक ऐसा ट्रस्ट है जो बड़ी संख्या में ऐसे निवेशकों की धनराशि एकत्रित करता है जिनका एकसा उद्देश्य है।

इस फंड के प्रबंधन के लिए फंड प्रबंधक नियुक्त होते हैं। इस सामूहिक निवेश से जो आमदनी /लाभ उत्पन्न होता है, उसे सही अनुपात में निवेशकों में वितरित कर दिया जाता है।

एक आम आदमी के लिए म्यूचुअल फंड सबसे साध्य विकल्प है जो उसे विभिन्न प्रकार के सिक्योरिटियों में निवेश करने का अवसर प्रदान करता है और जिसकी लागत भी अपेक्षाकृत कम है।

क्या म्यूचुअल फ़ंड निवेश के लिए सही विकल्प है?

जी हाँ, छोटे निवेशकों के लिए धन सृजन का सबसे उपयुक्त माध्यम है- म्यूचुअल फंड्स।

म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करने के कुछ प्रमुख लाभ:

  1. पेशेवर संचालन

म्यूचुअल फ़ंड के हर स्कीम का संचालन करने के लिए एक पेशेवर व्यक्ति (फंड मैनेजर) की नियुक्ति की जाती है।

अगर आपको बाजार के विशेषज्ञ से सेवा लेने की इच्छा हो तो उसके लिए आपको एक मोटी फीस देनी पड़ेगी।

म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करने से आपको एक पेशेवर व्यक्ति की सेवा बहुत ही कम फीस में मिल जाती है।

  1. फंड का स्वामित्व

एक निवेशक होने की वजह से जिस स्कीम में आप निवेश करते हैं, उस स्कीम की यूनिट्स प्राप्त हो जाती है और स्कीम के कुल यूनिट्स के अनुपात में आपका उस स्कीम में स्वामित्व बन जाता है।

चाहे आपका निवेश कम हो या ज्यादा, इससे फर्क नहीं पड़ता है। आपके फंड ने जिन साधनों में निवेश कर रखा है, उन सभी साधनों पर आनुपातिक रूप से आपका अधिकार बनता है।

  1. जोखिम का बंटवारा

म्यूचुअल फ़ंड अपने निवेश-लक्ष्य के आधार पर आपके पैसे को विभिन्न साधन (जैसे शेयर, बांड्स, आदि) में निवेशित करता है।

विभिन्न साधनों में बंटे होने की वजह से निवेश-के-जोखिम का बंटवारा हो जाता है, यानि जोखिम कम हो जाता है।

यदि किसी एक साधन (शेयर) के मूल्य में अचानक गिरावट होती है, तो दूसरे साधन (बांड्स) संबल प्रदान करते हैं।

साभार: म्यूचुअल फ़ंड सही है

निवेश लक्ष्य के अनुसार म्यूचुअल फंड कितने तरह के होते हैं?

निवेश लक्ष्य के अनुसार मोटे तौर पर म्यूचुअल फंड तीन प्रकार के होते हैं:

  1. इक्विटि फंड्स : ये अधिकांश रूप से इक्विटी अर्थात कंपनियों के शेयर में निवेश करते हैं। इनका मूल उद्देश्य पूंजी वृद्धि होता है। इनमें उच्च लाभ देने की अच्छी संभावनाएं होती हैं और दीर्घकालीन निवेश के लिए ये सर्वश्रेष्ठ हैं।
  2. आय फंड्स : ये नियत आय प्रतिभूतियों जैसे सरकारी प्रतिभूतियां या बॉन्ड, कॉमर्शियल पेपर या डिबेंचर, डिपॉज़िट के बैंक सर्टीफिकेट जैसे मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं। ये तुलनात्मक रूप से सुरक्षित निवेश होते हैं और आय निर्माण के लिहाज से उपयुक्त होते हैं।
  3. हाइब्रिड फंड्स : ये इक्विटी और डेब्ट दोनों में निवेश करते हैं। यानि कुछ हिस्सा कंपनियों के शेयर में और कुछ हिस्सा सरकारी प्रतिभूतियां, बॉन्ड, कॉमर्शियल पेपर या डिबेंचर जैसे मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करते हैं। इस प्रकार से ये वृद्धि संभावनाओंके साथ-साथ आय निर्माण का सर्वश्रेष्ठ अवसर प्रदान करते हैं।

क्या प्रत्येक म्यूचुअल फंड स्कीम में अलग-अलग प्लान भी होते हैं?

जी हाँ, प्रत्येक म्यूचुअल फंड स्कीम में तीन प्लान होते हैं :

  1. ग्रोथ प्लान : निवेश से जो आमदनी /लाभ उत्पन्न होता है, वह स्कीम के NAV में दिखता है। लंबी अवधि के लिए यह प्लान सबसे उपयुक्त है।
  2. डिविडेंड री-इन्वेस्ट प्लान : निवेश से जो आमदनी /लाभ उत्पन्न होता है, उसे डिविडेंड के रूप में दुबारा निवेश कर दिया जाता है। आपके यूनिटों की संख्या बढ़ जाएगी।
  3. डिविडेंड पे-आउट प्लान : निवेश से जो आमदनी /लाभ उत्पन्न होता है, उसे डिविडेंड के रूप में आपको दे दिया जाता है। नियमित आय के लिए यह प्लान चुन सकते हैं। मगर ध्यान रहे कि आपके पे-आउट में से डिविडेंड वितरण कर (Dividend Distribution Tax) काट लिया जाता है।

परिपक्वता के आधार पर म्यूचुअल फंड कितने तरह के होते हैं?

परिपक्वता के आधार पर म्यूचुअल फंड तीन तरह के होते हैं :

  1. ओपन एंड : इन फंड्स में किसी भी समय प्रवेश और निकासी किया जा सकता है। यानि कभी भी खरीदा और बेचा जा सकता है।
  2. क्लोज़ एंड : इन फंड्स में एक निश्चित समय के दौरान ही प्रवेश और निकासी किया जा सकता है। अन्य समय में ये फंड न तो खरीदे जा सकते हैं, ना बेचे जा सकते हैं।
  3. इनटर्वल फ़ंड : ये फंड्स कुछ समय के लिए ही खुले होते हैं। और इन फंड्स में उसी समय के दौरान प्रवेश या निकासी किया जा सकता है। अन्य समय में ये फंड बंद रहते हैं यानि न तो खरीदे जा सकते हैं, ना ही बेचे जा सकते हैं।

क्या टैक्स बचत के लिए अलग तरह का म्यूचुअल फ़ंड है?

जी हाँ, टैक्स बचत के लिए एक अलग तरह का म्यूचुअल फ़ंड है जिसे ELSS (इक्विटि लिंक्ड सेविंग स्कीम) कहते हैं।

इसमें आपका पैसा तीन साल के लिए लॉक हो जाता है।

आप इस दौरान अपने निवेश को नहीं निकाल सकते हैं और इसी लॉक-इन के लिए आपको आयकर के धारा 80C के तहत छूट मिलती है।

तीन साल बाद आप चाहें तो निवेशित रह सकते हैं या निकल भी सकते हैं।

म्यूचुअल फंड में स्वयं निवेश करें या वितरक के द्वारा? इस महत्वपूर्ण प्रश्न का उत्तर जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।